वाह चाँद! 

उस चाँद को देखो, तुम्हे उसके दाग दिख रहे है. करीब से देखो तो समझ आएगा, वह दाग नहीं, लोग है लोग और उनके कुछ अनकही ख्वाहिशें. मुझे दिख रही है एक नारी  नारी नहीं, शायद लड़की ही हो. नाचती हुई, गाती हुई, एक लड़की, जो सब कुछ भुलाकर बस चाँद पर अपने पैर थिरका… Continue reading वाह चाँद!